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मोर के बारे में 10 फैक्ट्स ये भी जाने

हाथी के बारे में 10 फैक्ट्स ये भी जाने

1. कछुए को "खगोलीय चीजें" भी कहा जाता है क्योंकि इसकी चलने की गति बहुत धीमी होती है, जिससे यह बहुत अद्भुत दृश्य बनाता है।

2. कछुए का शरीर कठिन होता है और उसे सुरक्षित रखने के लिए एक गाँठदार कवच होता है जो उसे हवा में बहुत लंबे समय तक रहने में मदद करता है।

3. कछुए का शेल उसकी सुरक्षा में मदद करता है, लेकिन यह सुरक्षा के लिए ही नहीं बल्कि उसकी बहुत अच्छी दौड़ के लिए भी है।

4. विभिन्न प्रकार के कछुओं का आकार और रंग भिन्न हो सकता है, जैसे लांग नेक टर्टल, सी टर्टल, और लीथरबैक टर्टल।

5. कछुए दीवारों को चढ़ सकते हैं और यह उन्हें अपनी सुरक्षा के लिए बनाए रखने में मदद करता है।

 6.कछुए के आंतरदृष्टि बहुत अच्छी होती है और वह अपने घर या स्थान को बड़ी दूरी से पहचान सकते हैं।

.7 कछुए के पास बड़े पैर होते हैं जो उन्हें पानी में तैरने में मदद करते हैं।

8. कछुए की बूँदें भी समय-समय पर आती हैं, और इसे पानी में रहने के लिए उचित बनाए रखने के लिए आवश्यक होती हैं।

9. कछुए की आंखें ऊपर की ओर होती हैं, जिससे वे पानी में छुपे खाद्य को अच्छे से देख सकते हैं।

10. कछुए के बच्चे कभी-कभी "कछुआ" या "कछुए" कहलाते हैं और वे बड़े होने में कई वर्षों का समय लेते हैं।



Firstviewthink November 27, 2023
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 1. **रंगीन पंख:** मोर के पंख विविध रंगों में होते हैं और इन्हें खूबसूरत छायाएं बनाने के लिए प्रचुरता से इस्तेमाल किया जाता है।

हाथी के बारे में 10 फैक्ट्स  ये भी जाने

कछुए के बारे में 10 फैक्ट्स ये भी जाने

2. **छटपटाहट:** मोर अपनी छटपटाहट और चेहरे की भव्यता से मशहूर हैं, जो उनके स्थान के साथी को आकर्षित करने में मदद करती हैं।

3. **उन्नत चेहरा:** उनके मुख्य चेहरे पर विशेष अंगूलियां होती हैं जिन्हें खुलासा करके वे अपनी बड़ी सुंदरता को प्रदर्शित करते हैं।

4. **श्रृंगार:** मोर अपनी श्रृंगार कला के लिए जाने जाते हैं और इसे दिखाकर वे साथी को प्रभावित करते हैं।

5. **चिरपिंग आवाज:** मोर की आवाज एक विशेष प्रकार की करकटी या करकराएं में होती है जो सुनने में बहुतंत्र होती है।

6. **मातृत्व:** मोर माता-पिता के रूप में अच्छे प्रकार से जाने जाते हैं और अपने बच्चों की देखभाल करते हैं।

7. **आदर्श नृत्यकला:** मोर का नृत्य अपनी आदर्श नृत्यकला के लिए प्रसिद्ध है, जो देखने वालों को मोहित कर देता है।

8. **बौद्धिकता:** मोर बहुतें परिस्थितियों के साथ सहारा करने के लिए बौद्धिक होते हैं और आकारगत बुद्धिमानी दिखाते हैं।

9. **प्राकृतिक सुंदरता:** इन्हें प्राकृतिक वातावरण में देखना एक अद्भुत दृश्य होता है जो इनकी सुंदरता को और बढ़ाता है।

10. **प्रिय राष्ट्रीय पक्ष:** मोर भारत का राष्ट्रीय पक्ष है और इसे देश की गरिमा का प्रतीक माना जाता है।

Firstviewthink November 26, 2023
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मोर के बारे में 10 फैक्ट्स  ये भी जाने
कछुए के बारे में 10 फैक्ट्स ये भी जाने

 1. हाथी विश्व के सबसे बड़े जीवाणु हैं और इनकी सबसे बड़ी खासियत उनके बड़े होते हैं, जो घास, पेड़ों और फलों को खाने में मदद करती हैं।

2. हाथी का दांत लाल होता है, जिसे "इवोरी" कहा जाता है, और यह आकर्षकता के लिए अवैध व्यापार का कारण बनता है।

3. ये बुश और खुले स्थलों दोनों में रह सकते हैं, और उनके लिए सामाजिक संरचना महत्वपूर्ण है।

4. हाथी अद्वितीय नाक के साथ अपनी शानदार बुद्धिमता के लिए प्रसिद्ध हैं, जिससे वे बूंदें सुझा सकते हैं और नीचे स्थानीय स्रावों तक पहुंच सकते हैं।

5. ये एक सामूहिक जीवन जीते हैं और अपने समूह के सदस्यों के साथ मददगार होते हैं, खासकर बच्चों की देखभाल में।

6. हाथी की बड़ी कर्णपात के लिए विशेष पहचान होती है, और यह उनकी स्वाभाविक सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।

7. इनकी सुनने की शक्ति बहुत अच्छी होती है, और वे अच्छी तरह से दूरबीन बिना भी सुन सकते हैं।

8. हाथी का गर्भावस्था काफी लंबी होती है, और वे अपने बच्चे के लिए बहुत सावधानी से देखभाल करती हैं।

9. ये विभिन्न प्रकार के भूमि में रह सकते हैं, समुद्रतल से लेकर पहाड़ों तक।

10. हाथी को "गज" भी कहा जाता है और इन्हें अफ्रीका और एशिया में पाया जा सकता है।


Firstviewthink November 26, 2023
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 **कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI): एक सृजनात्मक परिचय**

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कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जिसे सामान्यत: AI के रूप में जाना जाता है, एक विज्ञान है जो कंप्यूटर तकनीकी का अद्वितीय क्षेत्र है जिसमें मशीनें स्वयं सिखने की क्षमता प्राप्त करने का प्रयास करती हैं। यह विश्व को नए और उन्नत सोच धारित करने में एक अद्भुत परिवर्तन ला रहा है।


**कृत्रिम बुद्धिमत्ता कैसे काम करती है?**


कृत्रिम बुद्धिमत्ता की मूल धारा मशीन लर्निंग में है, जिसमें कंप्यूटर प्रोग्राम खुद से सीखता है और सुधारता है बिना मानव हस्तक्षेप के। इस प्रक्रिया में, अल्ग-अलग प्रकार के डेटा का अध्ययन किया जाता है और सिखाया जाता है कि इसे कैसे आपसी संबंधों और नियमों को समझने का योग्य बनाया जा सकता है।


**कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग क्षेत्र**


1. **नेतृत्व में सुधार:** कृत्रिम बुद्धिमत्ता नेतृत्व क्षमताओं को सुधारने में मदद कर सकती है, जैसे कि उच्च स्तर के नेताओं के लिए अद्वितीय नेतृत्व कौशल विकसित करना।


2. **स्वास्थ्य सेवाएं:** चिकित्सा और स्वास्थ्य क्षेत्र में, AI स्वास्थ्य सेवाओं को सुधारने में सहायक हो सकती है, जैसे कि रोग का पहचान और उपचार।


3. **शिक्षा:** AI शिक्षा क्षेत्र में विभिन्न रूपों में शिक्षा प्रदान करने के लिए उपयोग हो सकती है, जैसे कि व्यक्तिगत पढ़ाई का समर्थन करना और शिक्षा सामग्री को व्यक्तिगत करना।


**चुनौतियाँ और चिंताएं**


1. **आदमी-मशीन संबंध:** AI के तेजी से बढ़ते उपयोग के साथ, आदमी-मशीन संबंध की चुनौतियों और नैतिकता की चिंताओं ने भी उत्पन्न की हैं। 


2. **निजी जानकारी की सुरक्षा:** AI के उपयोग से जुड़ी निजी जानकारी की सुरक्षा एक बड़ी चिंता है, खासकर जब यह जानकारी उपयोगकर्ताओं के स्वास्थ्य या व्यक्तिगत जीवन से संबंधित होती है।

**निष्कर्ष**

कृत्रिम बुद्धिमत्ता हमारे समाज को सुधारने और विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है,

Firstviewthink November 26, 2023
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 सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को केंद्र को संविधान के तहत अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के आनुपातिक प्रतिनिधित्व के लिए एक नया परिसीमन आयोग गठित करने का निर्देश दिया। पीठ ने कहा कि हमने स्पष्ट कर दिया है कि केंद्र को परिसीमन आयोग का गठन करना होगा। इसमें कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट के पास संसद द्वारा अधिनियमित कोई भी प्रविधान असंवैधानिक है या नहीं न्यायिक समीक्षा का अधिकार है।


पीटीआई, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को केंद्र को संविधान के तहत अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के आनुपातिक प्रतिनिधित्व के लिए एक नया परिसीमन आयोग गठित करने का निर्देश दिया। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि वह संसद को इसके लिए संशोधन करने या कानून बनाने का निर्देश नहीं दे सकते, क्योंकि यह विधायी क्षेत्र में दखल देना होगा।

पीठ ने कहा कि कोर्ट के लिये यह निर्देश देना कि आरक्षण को बढ़ाया जाए तथा संसद को अनुसूचित जनजातियों सहित सभी अन्य समुदायों के लिये अनुपातिक प्रतिनिधित्व देने संबंधी कानून बनाना चाहिए, कानून बनाने के अधिकार क्षेत्र में दखल देना होगा।

 पर पीठ ने दिया यह निर्देश

सिक्किम और पश्चिम बंगाल की विधानसभाओं में लिम्बु और तमांग आदिवासी समुदायों के आनुपातिक प्रतिनिधित्व की मांग करने वाली याचिका पर प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पार्डीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ ने निर्देश जारी किया।

पीठ ने कहा कि हमने स्पष्ट कर दिया है कि केंद्र को परिसीमन आयोग का गठन करना होगा। इसमें कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के पास संसद द्वारा अधिनियमित कोई भी प्रविधान असंवैधानिक है या नहीं, न्यायिक समीक्षा का अधिकार है।

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Firstviewthink November 25, 2023
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 जैसा कि आप सभी जानते है हमारे देश में 26 नवंबर का दिन बेहद खास है क्योंकि इस दिन को देशभर में संविधान दिवस के रूप में मनाते है और इसीलिए आज हम आपको हमारे संविधान की कहानी बताने जा रहे है 


भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है। इसके साथ ही भारत का संविधान विश्व का सबसे बड़ा लिखित संविधान है. देश का कानून इस संविधान द्वारा ही संचालित होता है. हालांकि, क्या आपको पता है कि भारत के संविधान का निर्माण कैसे हुआ था, यदि नहीं, तो इस लेख के माध्यम से हम जानेंगे।

वर्ष 2015 से देश में हर वर्ष 26 नवंबर को संविधान दिवस के रूप में मनाया जाता है. भारत का संविधान विश्व का सबसे बड़ा लिखित संविधान है और देश का कानून और संसद इसके द्वारा ही संचालित होती है. क्या आप जानते हैं आखिर कैसे बना देश का इतना बड़ा संविधान? और क्या खासियत है हमारे देश के संविधान की ? आइये जानें संविधान निर्माण की पूरी कहानी.


भारत के संविधान का निर्माण 26 नवम्बर 1949 को हुआ था. इस संविधान का निर्माण एक संविधान सभा द्वारा किया गया था इसके निर्माण में 2 वर्ष 11 माह और 18 दिन का समय लगा था. संविधान सभा के निर्माण का प्रस्ताव सर्वप्रथम वर्ष 1934 में एम.एन. रॉय द्वारा रखा गया था, जबकि संविधान सभा के गठन के लिए चुनाव वर्ष 1946 में कैबिनेट मिशन योजना के तहत हुए थे.

संविधान सभा के सदस्यों की कुल संख्या 389 निश्चित की गई थी. जिसमें 292 प्रतिनिधि ब्रिटिश प्रान्तों के, 4 चीफ कमिश्नर और 93 प्रतिनिधि देशी रियासतों के थे. कुल 389 सदस्यों में से प्रांतों के लिए निर्धारित 296 सदस्यों के लिय चुनाव हुए, जिसमें कांग्रेस को 208 वोट, मुस्लिम लीग को 73 वोट और 15 वोट अन्य दलों को और स्वतंत्र उम्‍मीदवार को मिले थे. 

संविधान सभा की प्रथम बैठक का आयोजन 9 दिसंबर 1946 को दिल्ली स्थित काउंसिल चैम्बर के पुस्तकालय भवन में हुआ था और इसकी अध्यक्षता सभा के सबसे बुजुर्ग सदस्य सच्चीदानंद सिन्हा ने की थी. वह सभा के अस्थाई अध्यक्ष चुने गए थे. संविधान सभा के स्थायी अध्यक्ष डॉ राजेंद्र प्रसाद थे. 

संविधान सभा में प्रांतों या देसी रियासतों को उनकी जनसंख्या के अनुपात में सीटों का प्रतिनिधित्व दिया गया था, साधारणतः 10 लाख की आबादी पर एक स्थान का आबंटन किया गया था. हैदराबाद रियासत के प्रतिनिधियों ने संविधान सभा में भाग नहीं लिया था. 

संविधान सभा में 12 महिला, 33 अनुसूचित जाति, 213 सामान्य, 4 सिख और 79 मुस्लिम सदस्य थे.

संविधान सभा की कार्यवाही 13 दिसम्बर 1946 ई. को जवाहर लाल नेहरू द्वारा प्रस्तुत उद्देश्य प्रस्‍ताव के साथ हुई थी.         

भारत के संविधान का निर्माण एक संविधान सभा द्वारा किया गया था और इस सभा में 13 समितियां थी. जो संविधान सभा के विभिन्न कार्यों से निपटने के लिए गठित की गईं थी. इन समितियों में 8 समितियां प्रमुख थीं, नीचे उन समितियों के नाम और उनके अध्यक्ष के नाम दिए गयें हैं-  

मसौदा समिति बी.आर. अंबेडकर  

संघ शक्ति समिति जवाहरलाल नेहरू

केंद्रीय संविधान समिति जवाहरलाल नेहरू

प्रांतीय संविधान समिति वल्लभभाई पटेल

मौलिक अधिकारों, अल्पसंख्यकों और जनजातीय तथा बहिष्कृत क्षेत्रों पर सलाहकार समिति वल्लभभाई पटेल

प्रक्रिया समिति के नियम राजेंद्र प्रसाद

राज्य समिति (राज्यों के साथ बातचीत के लिये समिति) जवाहरलाल नेहरू

संचालन समिति राजेंद्र प्रसाद

संविधान सभा के संवैधानिक सलाहकार बी. एन राव थे. राव ने दुनिया के बहुत सारे संविधानों का अध्ययन किया और यूके, आयरलैंड, कनाडा, अमेरिका जाकर वहां के विधि विद्वानों से इसके विषय में विस्तृत चर्चा की. फिर अक्टूबर 1947 में उन्होंने संविधान का पहला ड्राफ्ट तैयार किया और इस ड्राफ्ट को भीमराव अंबेडकर की अध्यक्षता वाली 7 सदस्यीय ड्राफ्टिंग कमेटी को सौंपा गया. इस ड्राफ्ट पर विचार करने के बाद कमेटी ने एक नया ड्राफ्ट तैयार किया और उसे पर संविधान सभा के सुझाव मांगे. दिए गए सुझावों के आधार पर ड्राफ्ट में कई बदलाव किये गए और बदले हुए ड्राफ्ट के सभी प्रावधानों पर एक वर्ष तक चर्चा हुई. जिसके बाद संविधान को 26 नवंबर, 1949 को संविधान सभा द्वारा अंगीकृत किया गया था.      

26 जनवरी 1950 को संविधान देश में पूरी तरह से लागू हो गया, मूल संविधान में कुल 22 भाग, 395 अनुच्छेद और 8 अनुसूचियां थीं. जबकि वर्तमान में इसमें 470 अनुच्छेद, 25 भाग, और 12 अनुसूचियां हैं.

संविधान और उसके विदेशी स्त्रोत 

भारतीय संविधान के 70 प्रतिशत भाग को 1935 के भारत सरकार अधिनियम से लिया गया है ,जबकि अन्य प्रावधानों को अलग-अलग देशों से लिए गया है आइये जानें कौन सा प्रावधान किस देश से लिया गया है. 

संयुक्त राज्य अमेरिका  - मौलिक अधिकार, न्यायिक पुनरावलोकन, संविधान की सर्वोच्चता, न्यायपालिका की स्वतंत्रता, निर्वाचित राष्ट्रपति एवं उस पर महाभियोग, उपराष्ट्रपति उच्चतम एवं उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों को हटाने की विधि एवं वित्तीय आपात 

ब्रिटेन -  संसदात्मक शासन-प्रणाली, एकल नागरिकता एवं विधि निर्माण प्रक्रिया

आयरलैंड - नीति निर्देशक सिद्धांत, राष्ट्रपति के निर्वाचक-मंडल की व्यवस्था, राष्ट्रपति द्वारा राज्य सभा में साहित्य, कला, विज्ञान तथा समाज-सेवा इत्यादि के क्षेत्र में ख्यातिप्राप्त व्यक्तियों का मनोनयन, आपातकालीन आपातकालीन उपबंध

ऑस्ट्रेलिया -  प्रस्तावना की भाषा, समवर्ती सूची का प्रावधान, केंद्र एवं राज्य के बीच संबंध तथा शक्तियों का विभाजन

 जर्मनी - आपातकाल के प्रवर्तन के दौरान राष्ट्रपति को मौलिक अधिकार संबंधी शक्तियां

कनाडा - संघात्‍मक विशेषताएं अवशिष्‍ट शक्तियां केंद्र के पास

 दक्षिण अफ्रीका - संविधान संशोधन की प्रक्रिया प्रावधान

 रूस - मौलिक कर्तव्यों का प्रावधान

जापान - विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया 

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Firstviewthink November 24, 2023
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 गोवा के सिमटते समुद्र तट पर बनी ताजा और विचारोत्तेजक लघु फिल्म ‘ओड’ ने आज गोवा में 54वें भारत अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में आयोजित ‘75 क्रिएटिव माइंड्स ऑफ टुमॉरो’ (सीएमओटी) में सर्वश्रेष्ठ फिल्म का पुरस्कार जीता।


विजेताओं को बधाई देते हुए, सूचना और प्रसारण मंत्रालय के संयुक्त सचिव (फिल्म) एवं एनएफडीसी के प्रबंध निदेशक श्री पृथुल कुमार ने फिल्म निर्माण के क्रम में सही कंटेंट को पहचानने के महत्व पर प्रकाश डाला, जो भारत को वैश्विक स्तर पर स्थापित करेगा। उन्होंने कहा, “सीएमओटी देश भर की उन युवा रचनात्मक प्रतिभाओं के लिए सबसे अच्छा मंच है जो अच्छे कंटेंट वाली फिल्में बनाने के प्रति समर्पित हैं।”


इस अवसर पर बोलते हुए, 75 सीएमओटी के जूरी सदस्यों में से एक, निर्देशक शूजीत सरकार ने कहा कि आत्म-निरीक्षण, आशा, विरोध आदि जैसी सभी भावनाओं को प्रदर्शित करते हुए 'द मिशन लाइफ' विषय पर 48 घंटों में एक लघु फिल्म बनाना अविश्वसनीय है।

इस प्रतियोगिता में शामिल सभी फिल्मों की टीम के सदस्यों को बधाई देते हुए, शूजीत सरकार ने कहा कि सभी फिल्में वास्तव में प्रासंगिक व विचारोत्तेजक हैं और पर्यावरण की रक्षा एवं संरक्षण के एक बेहद ही महत्वपूर्ण विषय से संबंधित हैं। उन्होंने कहा, “आप सभी पहले से ही विजेता हैं।”

ओड के बारे में: मछुआरा मार्सेलिन पार्किंग की जगह ढूंढने की कोशिश करते हुए अपनी नाव को शहर के बीच में ले जाता है। उसकी शिकायत है कि समुद्र तट चोरी हो गया है और उसके पास अपनी नाव खड़ी करने के लिए कोई जगह नहीं बची है। यह फिल्म समुद्र के स्तर में वृद्धि और समुद्र तटों पर बड़े पैमाने पर हो रहे निर्माण के कारण गोवा के सिमटते समुद्र तटों के मुद्दे पर प्रकाश डालती है। Courtesy - PIB delhi

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Firstviewthink November 24, 2023
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Sam Altman OpenAI CEO: AI की दुनिया के सबसे बड़े नाम से एक सैम ऑल्टमैन लगातार चर्चा में हैं. पहले उन्हें OpenAI के CEO के पद से हटा दिया गया. फिर उन्हें माइक्रोसॉफ्ट में नई जिम्मेदारी दी गई और अब वह OpenAI में बतौर CEO वापस आ रहे हैं. ये बस एक हफ्ते में अंदर हुआ है. आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला.


Open AI इन दिनों चर्चा में बना हुआ है. चर्चा CEO के बार-बार बदलने की है. पिछले हफ्ते Sam Altman को आनन-फानन में CEO के पद से हटा दिया गया. बोर्ड ने अचानक ये फैसला लिया और Google Meet पर सैम ऑल्टमैन को इसकी जानकारी दी. सैम को हटाए जाने के बाद Open AI के प्रेसिडेंट Greg Brockman ने भी इस्तीफा दे दिया. 

हालांकि, सैम ऑल्टमैन की OpenAI में अब वापसी हो रही है. कंपनी ने इसकी जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर दी है. दरअसल, सैम ऑल्टमैन को हटाए जाने के बाद OpenAI के बहुत से कर्मचारी इस्तीफा देने को तैयार थें.

Sam Altman की OpenAI में वापसी
कंपनी ने लिखा कि हम एक नए बोर्ड के साथ बतौर OpenAI के CEO सैम ऑल्टमैन की वापसी के लिए एक एग्रीमेंट इन प्रिंसिपल पर पहुंचे हैं. इस बोर्ड में Bret Taylor (Chair), Larry Summers और Adam D'Angelo हैं. अन्य डिटेल्स के लिए हम संपर्क कर रहे हैं. इस दौरान धैर्य बनाए रखने के लिए शुक्रिया अदा करते हैं. Read more -Aajtak.in 

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Firstviewthink November 24, 2023
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 नीदरलैंड के सांसद गीर्ट वाइल्डर्स की पार्टी ने देश के संसदीय चुनाव में भारी जीत दर्ज की है. साथ ही गीर्ट अगला सत्तारूढ़ गठबंधन बनाने की स्थिति में हैं. ऐसे में उनके  अगले प्रधानमंत्री बनने की संभावना है. गीर्ट वाइल्डर्स ने साल 2022 में विवादों में रही बीजेपी नेता नूपुर शर्मा का सपोर्ट किया था. गीर्ट वाइल्डर्स ने देश में आवास की कमी, बढ़ती महंगाई और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच पर अपने चुनाव प्रचार अभियान को केंद्रित रखा था. गौरतलब है कि वाइल्डर्स को इस्लामी चरमपंथियों की ओर से जान से मारने की धमकी मिल चुकी है. ब्रिटेन ने एक बार उनके ब्रिटेन में प्रवेश पर रोक लगा दी थी. 


गीर्ट वाइलडर्स इजराइल के कट्टर समर्थक भी हैं. नीदरलैंड के दूतावास को यरूशलम ट्रांसफर करने तथा रामल्ला में नीदरलैंड राजनयिक पद को समाप्त करने के भी पक्ष में हैं. कट्टरपंथी राजनीति के लिए महशूर वाइल्डर्स बहुत हाजिरजवाब भी हैं. उन्हें अपनी दो बिल्लियों से बहुत प्यार है. स्नोएत्जे और प्लुइसजे नामक इन दिनों बिल्लियों के ‘एक्स’ पर अपने अपने एकाउंट हैं और दोनों के करीब 23,000 फोलोअर्स हैं.  

पीएम बनने की जता चुके हैं इच्छा

गीर्ट वाइलडर्स ने डच मीडिया से गुरुवार को कहा कि वह पीएम बनाना चाहते हैं. साथ ही वह इस बात पर जनमत संग्रह के पक्ष में थे कि क्या नीदरलैंड को यूरोपीय संघ छोड़ देना चाहिए. उनकी पार्टी संसद में लगभग एक चौथाई सीटों का दावा करेगी, वाइल्डर्स को शासन करने के लिए गठबंधन में शामिल होने के लिए मुख्यधारा की पार्टियों की जरूरत है. फ्रीडम पार्टी, वीवीडी और सांसद पीटर ओमटजिग की एनएससी पार्टी के गठबंधन के पास संयुक्त रूप से 81 सीटें होंगी. 

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Firstviewthink November 24, 2023
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 संथाली साड़ी: भारतीय सांस्कृतिक समृद्धि का प्रतीक


भारत, अपनी समृद्धि से भरपूर सांस्कृतिक विविधता के साथ, अनेक जातियों और समुदायों के विभिन्न आचार्य और रीतिरिवाजों का घर है। इसी में से एक है संथाल समुदाय, जो अपने विशेष सांस्कृतिक और सामाजिक अंशों के लिए प्रसिद्ध है। संथाली साड़ी, इस समृद्धि का एक महत्वपूर्ण प्रतीक है, जो संथाल स्त्रीयों के वस्त्राभूषण का महत्वपूर्ण हिस्सा है।


इन साड़ियों की विशेषता है उनकी भव्य डिज़ाइन और जीवंत रंग। आकर्षक रूप से सजीव हरियाली, लाल, नीला, और पीला इन साड़ियों की रंगत है, जो संथाली समुदाय की आन, बान, शान को दर्शाती हैं। ये साड़ियाँ संथाल स्त्रीयों के सौंदर्य और गरिमा को निखारती हैं, जो उनकी सांस्कृतिक आत्मा का प्रतीक हैं।

इन साड़ियों की डिज़ाइन में जटिलता है और उनमें उपयोग होने वाले स्थानीय बुनकरों की कला का स्पष्ट संदर्भ है। ये साड़ियाँ संथाल समुदाय की परंपरागत कला और शिल्प की महाकवि हैं, जो समृद्धि और आत्म-अभिवादन का प्रतीक हैं।

संथाली साड़ी न केवल एक वस्त्र है, बल्कि यह समृद्धि, विविधता, और समृद्धि का सूचक है, जो भारतीय सांस्कृतिक सामरिकी को सजीवता प्रदान करता है। इसे पहनना संथाल स्त्रीयों के लिए गर्व का विषय बन गया है, जो इसे अपने परंपरागत समृद्धि का हिस्सा मानती हैं।

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Firstviewthink November 24, 2023
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